NBS Scheme Kharif 2026: उर्वरक सब्सिडी से हर किसान को ₹41,534 करोड़ का सीधा फायदा | जानिए DAP और NPK पर कितनी बचत?वैकल्पिक SEO टाइटल:

अगर आप खरीफ की फसल की तैयारी कर रहे हैं और उर्वरक की बढ़ती कीमतों की चिंता सता रही है, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है।
सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए उर्वरक सब्सिडी में बड़ा इजाफा किया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 अप्रैल 2026 को न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) योजना के तहत फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों के लिए ₹41,534 करोड़ की सब्सिडी को मंजूरी दी है。
इसका सीधा मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमतें चाहे जितनी भी बढ़ जाएं, आपको DAP, NPK और दूसरे P&K उर्वरक पहले जैसी ही कीमत पर मिलते रहेंगे।
खास बात यह है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको कोई अलग से आवेदन नहीं करना है, सब्सिडी का फायदा सीधे उर्वरक की कीमत में ही शामिल रहता है।
योजना की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy – NBS) योजना |
| लाभ (₹) | नाइट्रोजन पर ₹47.32/kg, फॉस्फेट पर ₹52.76/kg, पोटाश पर ₹2.38/kg, सल्फर पर ₹3.16/kg की सब्सिडी |
| पात्रता | सभी किसान जो P&K उर्वरक खरीदते हैं (DAP, NPK, MOP आदि) |
| आवेदन मोड | आवेदन की आवश्यकता नहीं — सब्सिडी स्वतः उर्वरक की कीमत में समाहित |
| लागू अवधि | 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 |
| कुल आवंटन | ₹41,534 करोड़ (खरीफ 2025 के ₹37,216 करोड़ से ₹4,317 करोड़ अधिक) |
| शामिल उर्वरक | DAP, NPK, NPKS, MOP, MAP, TSP सहित 28 ग्रेड के P&K उर्वरक |
NBS योजना क्या है और यह कैसे काम करती है?
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना 1 अप्रैल 2010 से लागू है।
इसका मूल सिद्धांत सरल है, उर्वरक पर सब्सिडी उसकी पूरी कीमत पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर) की मात्रा के आधार पर दी जाती है।
यह योजना फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों पर लागू होती है, जैसे DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट), NPK, MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश), MAP (मोनो-अमोनियम फॉस्फेट) आदि। यूरिया इस योजना में शामिल नहीं है, क्योंकि यूरिया पर अलग से सब्सिडी दी जाती है।
यह कैसे काम करती है?
सरकार उर्वरक कंपनियों और आयातकों को प्रति किलोग्राम पोषक तत्व के हिसाब से निश्चित सब्सिडी देती है। इसके बदले कंपनियां किसानों को उर्वरक उचित और नियंत्रित कीमत पर बेचती हैं।
आप जब दुकान से DAP या NPK खरीदते हैं, तो उसकी कीमत में सब्सिडी पहले से ही घटी हुई होती है।
उदाहरण: DAP की एक बोरी (50 kg) की अंतरराष्ट्रीय कीमत भले ही ₹2,500 हो, लेकिन सरकार की सब्सिडी के कारण आपको वही बोरी लगभग ₹1,350 में मिलती है।
आपको क्या फायदा मिलेगा? (Mujhe Kya Fayda Milega?)
नई सब्सिडी दरें — खरीफ 2026
| पोषक तत्व | सब्सिडी दर (प्रति किलोग्राम) | पिछली दर (रबी 2025-26) | कितनी बढ़ोतरी? |
|---|---|---|---|
| नाइट्रोजन (N) | ₹47.32 | ₹43.02 | 10% बढ़ोतरी |
| फॉस्फेट (P) | ₹52.76 | ₹47.96 | 10% से अधिक (लगभग 21%) |
| पोटाश (K) | ₹2.38 | ₹2.38 | कोई बदलाव नहीं |
| सल्फर (S) | ₹3.16 | ₹2.87 | 10% बढ़ोतरी |
व्यावहारिक फायदा क्या है?
- DAP की कीमत स्थिर रहेगी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद DAP की 50 kg की बोरी लगभग ₹1,350 में ही मिलती रहेगी।
- NPK और NPKS उर्वरक सस्ते रहेंगे: जिन उर्वरकों में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर का मिश्रण होता है, उनकी कीमतों में भी स्थिरता रहेगी।
- संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा: NBS योजना का एक उद्देश्य यह भी है कि किसान केवल यूरिया पर निर्भर न रहें, बल्कि मिट्टी की जरूरत के अनुसार P&K उर्वरकों का भी संतुलित उपयोग करें।
- कुल 28 ग्रेड के उर्वरक शामिल: सरकार NBS के तहत 28 अलग-अलग प्रकार के P&K उर्वरकों पर सब्सिडी दे रही है।
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर भी अतिरिक्त सब्सिडी: जिन उर्वरकों में जिंक, बोरोन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए जाते हैं, उन पर अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान है।
एक नजर में — आपकी जेब पर असर
अगर आप खरीफ सीजन में 10 बोरी DAP (500 kg) का उपयोग करते हैं, तो बिना सब्सिडी के आपको अंतरराष्ट्रीय कीमत पर करीब ₹1,200-₹1,500 प्रति बोरी अतिरिक्त चुकानी पड़ती। सरकार की सब्सिडी से यह बोझ सीधे कम हो जाता है।
कौन आवेदन कर सकता है? (Kaun Eligible Hai?)
NBS योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए आपको कोई अलग पात्रता पूरी करने की जरूरत नहीं है।
स्वतः पात्रता
- हर किसान पात्र है: जो भी किसान अधिकृत विक्रेता से P&K उर्वरक (DAP, NPK, MOP आदि) खरीदता है, उसे सब्सिडी का लाभ स्वतः मिल जाता है।
- कोई आय सीमा नहीं: इस योजना में छोटे, सीमांत, मझोले या बड़े किसानों के बीच कोई भेदभाव नहीं है।
- कोई भूमि सीमा नहीं: आपके पास चाहे एक बीघा जमीन हो या 10 एकड़, सब्सिडी सबको समान रूप से मिलती है।
- केवल P&K उर्वरकों पर लागू: यह योजना केवल फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों (DAP, NPK, MOP, MAP, TSP आदि) पर लागू होती है। यूरिया इसके दायरे में नहीं आता।
महत्वपूर्ण शर्तें
- उर्वरक केवल अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें — जिसके पास POS (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन हो।
- खरीदते समय आधार नंबर की जानकारी देना जरूरी हो सकता है।
- यह सब्सिडी केवल कृषि उपयोग के लिए खरीदे गए उर्वरक पर ही लागू होती है।
कौन से दस्तावेज चाहिए?
NBS योजना के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आपको कोई अलग से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है। लेकिन जब आप उर्वरक की दुकान पर जाते हैं, तो वहां निम्नलिखित जानकारी देनी पड़ सकती है:
| दस्तावेज/जानकारी | क्यों जरूरी है? |
|---|---|
| आधार कार्ड | पहचान सत्यापन और खरीद का रिकॉर्ड रखने के लिए |
| किसान पंजीकरण संख्या (यदि राज्य में लागू हो) | राज्य स्तरीय किसान डेटाबेस से लिंक करने के लिए |
| भूमि का विवरण (खसरा/खतौनी नंबर) | कुछ राज्यों में जरूरी हो सकता है |
| बैंक खाता विवरण | सीधे जरूरी नहीं, क्योंकि सब्सिडी आपके खाते में नहीं आती |
| मोबाइल नंबर | लेन-देन की सूचना के लिए |
ध्यान दें: यह जानकारी केवल उर्वरक की बिक्री का रिकॉर्ड रखने के लिए ली जाती है। आपको कोई फॉर्म नहीं भरना है, न ही किसी कार्यालय में जाना है।
आवेदन कैसे करें? (Mujhe Apply Kaise Karna Hai?)
यह सबसे अहम बात है जो आपको समझनी चाहिए — NBS योजना में किसान को कोई आवेदन नहीं करना होता।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
स्टेप 1: अधिकृत विक्रेता के पास जाएं
अपने इलाके की किसी भी अधिकृत उर्वरक दुकान पर जाएं। ध्यान रखें कि दुकान पर POS मशीन होनी चाहिए, जो DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) सिस्टम से जुड़ी हो।
स्टेप 2: जरूरी उर्वरक बताएं
दुकानदार को बताएं कि आपको कौन सा उर्वरक चाहिए — DAP, NPK, MOP, या कोई और P&K उर्वरक — और कितनी मात्रा में चाहिए।
स्टेप 3: आधार नंबर दें
दुकानदार आपसे आधार नंबर या किसान पंजीकरण संख्या मांग सकता है। यह केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सब्सिडी वाला उर्वरक सही व्यक्ति तक पहुंचे और इसका दुरुपयोग न हो।
स्टेप 4: POS मशीन पर बायोमेट्रिक सत्यापन
कई राज्यों में उर्वरक खरीदते समय POS मशीन पर अंगूठे का निशान (बायोमेट्रिक) देना पड़ता है। यह सिस्टम सुनिश्चित करता है कि सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे।
स्टेप 5: बिल लें और भुगतान करें
सब्सिडी घटने के बाद जो कीमत बनती है, वही आपको चुकानी है। उदाहरण के लिए — DAP की 50 kg की बोरी का बिल लगभग ₹1,350 आएगा। बिल जरूर लें और संभाल कर रखें।
स्टेप 6: रसीद की जांच करें
बिल पर यह जरूर देखें कि उसमें उर्वरक का नाम, मात्रा, कीमत और आपका आधार नंबर (या किसान आईडी) सही-सही लिखा हो।
ई-बिल प्रणाली — नई पारदर्शी व्यवस्था
सरकार ने हाल ही में एकीकृत ई-बिल प्रणाली (Integrated e-Bill System) शुरू की है, जिससे सब्सिडी क्लेम और भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी हो गई है। इस सिस्टम के तहत:
- उर्वरक कंपनियों का सब्सिडी क्लेम 7 से 10 कार्य दिवसों के भीतर प्रोसेस हो जाता है।
- इससे उर्वरक की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आती और किसानों को समय पर उर्वरक मिलता रहता है।
आवेदन में आम गलतियां (Common Mistakes)
हालांकि किसानों को खुद आवेदन नहीं करना है, फिर भी उर्वरक खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
| गलती | क्या हो सकता है? | सही तरीका |
|---|---|---|
| बिना POS मशीन वाली दुकान से खरीदना | सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा, पूरी कीमत चुकानी पड़ सकती है | केवल अधिकृत डीलर से खरीदें जहां POS मशीन हो |
| आधार नंबर न देना या गलत देना | खरीद का रिकॉर्ड नहीं बनेगा, भविष्य में दिक्कत हो सकती है | सही आधार नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन कराएं |
| बिल न लेना | किसी विवाद या शिकायत की स्थिति में सबूत नहीं होगा | हर खरीद का बिल जरूर लें और संभाल कर रखें |
| यह मान लेना कि सभी उर्वरक सब्सिडी वाले हैं | यूरिया और कुछ विशेष उर्वरकों पर अलग नियम हैं | दुकानदार से पूछें कि कौन सा उर्वरक NBS के तहत आता है |
| सिर्फ DAP पर निर्भर रहना | मिट्टी में अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है | मिट्टी परीक्षण कराकर संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें |
वास्तविकता जांच (Reality Check)
सब्सिडी का भुगतान सीधे किसान के खाते में नहीं होता
यह समझना बहुत जरूरी है, NBS योजना के तहत सब्सिडी की राशि किसान के बैंक खाते में नहीं आती है।
यह सब्सिडी सीधे उर्वरक कंपनियों और आयातकों को दी जाती है, ताकि वे किसानों को कम कीमत पर उर्वरक बेच सकें।
सीमित उर्वरक ग्रेड
NBS योजना 28 ग्रेड के P&K उर्वरकों पर लागू होती है। यूरिया और कुछ विशेष माइक्रोन्यूट्रिएंट उर्वरक इस योजना में शामिल नहीं हैं।
राज्य-वार अंतर
हालांकि NBS एक केंद्रीय योजना है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में उर्वरक की उपलब्धता और कीमत में थोड़ा अंतर हो सकता है। यह अंतर मुख्यतः स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और डीलर कमीशन के कारण होता है।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर
सरकार ने सब्सिडी बढ़ाई है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमतें बहुत अधिक बढ़ती हैं, तो सरकार को सब्सिडी और बढ़ानी पड़ सकती है। हालांकि, सरकार का स्पष्ट कहना है कि किसानों पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।
क्या समय पर उर्वरक मिलेगा?
सरकार के अनुसार, वर्तमान में देश में लगभग 18 मिलियन टन उर्वरक का स्टॉक मौजूद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17% अधिक है। इसलिए खरीफ सीजन में उर्वरक की कमी की संभावना नहीं है।
क्या यह योजना आपके लिए सही है?
फायदे (Pros)
- कोई आवेदन नहीं: सब्सिडी स्वतः मिल जाती है
- कोई पात्रता शर्त नहीं: हर किसान को समान लाभ
- कीमतों में स्थिरता: अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से सुरक्षा
- 28 उर्वरक ग्रेड शामिल: फसल के अनुसार चुनने की आजादी
- संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा: मिट्टी की सेहत बेहतर होती है
सीमाएं (Cons)
- सब्सिडी सीधे खाते में नहीं आती: जिन किसानों को नकद लाभ की उम्मीद थी, उन्हें निराशा हो सकती है
- यूरिया शामिल नहीं: केवल P&K उर्वरकों पर ही लागू
- राज्य-वार कीमत में अंतर: स्थानीय कारकों से थोड़ा फर्क आ सकता है
- POS मशीन अनिवार्य: छोटे और दूरदराज के गांवों में कभी-कभी दिक्कत
व्यावहारिक सलाह (Extra Value)
टिप 1: मिट्टी परीक्षण जरूर कराएं
NBS योजना का उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना है। इसलिए उर्वरक खरीदने से पहले अपनी मिट्टी की जांच जरूर कराएं। इससे आपको पता चलेगा कि आपकी मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है और कितनी मात्रा में उर्वरक डालना चाहिए। मिट्टी परीक्षण की सुविधा जिला कृषि कार्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) पर उपलब्ध है।
टिप 2: अधिकृत डीलर की पहचान कैसे करें
- दुकान के बाहर “अधिकृत उर्वरक विक्रेता” का बोर्ड देखें
- POS मशीन की मौजूदगी की पुष्टि करें
- दुकान का लाइसेंस नंबर और रिन्यूअल की तारीख देखें
- संदेह होने पर जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय से पुष्टि करें
चेतावनी: फर्जी वेबसाइट और कॉल से बचें
Some fake websites and people may call and ask for an “application fee” or “registration fee” in the name of the NBS scheme.
Remember, there is no application or fee for this scheme. If anyone asks you for money, be alert and inform the nearest agriculture office or the police.
आज ही उठाएं लाभ
अगर आप खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे हैं, तो नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से संपर्क करें और अपनी फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरक खरीदें।
याद रखें, सब्सिडी का लाभ स्वतः मिलता है, बस अधिकृत दुकान से खरीदना और बिल लेना न भूलें।
अधिक जानकारी के लिए: अपने जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय से संपर्क करें या उर्वरक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट fert.gov.in पर जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1: क्या NBS सब्सिडी का पैसा मेरे बैंक खाते में आएगा?
नहीं। NBS योजना में सब्सिडी की राशि किसान के खाते में नहीं आती। यह सब्सिडी सीधे उर्वरक कंपनियों को दी जाती है, जिससे वे किसानों को उर्वरक कम कीमत पर बेच पाते हैं। आपको फायदा उर्वरक की कम कीमत के रूप में मिलता है।
2. मुझे NBS योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है?
आपको कोई आवेदन करने की जरूरत नहीं है। यह योजना स्वतः लागू होती है। आप जब भी किसी अधिकृत दुकान से DAP, NPK या अन्य P&K उर्वरक खरीदते हैं, तो सब्सिडी घटने के बाद की कीमत ही चुकाते हैं।
3. क्या यूरिया भी NBS योजना में शामिल है?
नहीं। NBS योजना केवल फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों — जैसे DAP, NPK, MOP, MAP — पर लागू होती है। यूरिया पर अलग से सब्सिडी दी जाती है, जो एक अलग व्यवस्था के तहत आती है।
4. DAP की 50 kg की बोरी की कीमत कितनी होगी?
सरकार ने सुनिश्चित किया है कि DAP की 50 kg की बोरी की खुदरा कीमत लगभग ₹1,350 ही बनी रहेगी, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत कितनी भी बढ़ जाए।
5. खरीफ 2026 के लिए यह सब्सिडी कब से कब तक लागू है?
खरीफ 2026 के लिए NBS दरें 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगी।





